अजि पुरवा ही हौस
अजि पुरवा ही हौस प्रियकरा, मातृपदीं तनु मम बसवा ॥ स्त्री जगाला स्त्रीच विधाता, होत नाहिं जरि माता, विश्व-सुखीं विष कालवा ॥
अजि पुरवा ही हौस प्रियकरा, मातृपदीं तनु मम बसवा ॥ स्त्री जगाला स्त्रीच विधाता, होत नाहिं जरि माता, विश्व-सुखीं विष कालवा ॥