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अजि पुरवा ही हौस

Aji Purava Hi Hous

कृ. प्र. खाडिलकर

अजि पुरवा ही हौस प्रियकरा, मातृपदीं तनु मम बसवा ॥

स्त्री जगाला स्त्रीच विधाता, होत नाहिं जरि माता,
विश्व-सुखीं विष कालवा ॥