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जादुगार नयन तुझे

Jadugar Nayan Tujhe

स. अ. शुक्ल

जादुगार नयन तुझे । हिरे गहिरे, झळकती हंसरे ।
लोल गोल नवतेजे ॥

उन्मादक मनमोहक, परि का । चंद्रकांती अति दाहक ।
नजरेतिल ना उमजे ॥