Na Ranbhumi Na Vilasan
कृ. प्र. खाडिलकर
न रणभूमि न विलसन, एकावरी प्रेम न धरि कुरुजन ॥ समप्रीति जरी ख्याति, नातें भगिनीचें तुझें साचें; करिं मनन ॥
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