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नाट्यगाननिपुण कलावतिची

Natya Gaan Nipun

गो. ब. देवल

नाट्यगाननिपुण कलावतिची ही माया ॥

अंतरिंचा भाव एक । दाखवि वरपांगि एक ।
बाह्यांतर वृत्ति देख । भिन्‍न भिन्‍न छाया ॥